वो
Saturday, December 6, 2008
खुली किताब थे हम उनके लिए,
चाहते तो पढ़ लेते थे ,
पर वो झोंके की तरह आए ,
और हमें उड़ाके चल दिए
उनकी क्या बात करें,
ना जीने ना मरने देते है,
शायरी सुन वाह वाह तो करते है,
मतलब जाने बिना चल देते है
--स्नेहा
खुली किताब थे हम उनके लिए,
चाहते तो पढ़ लेते थे ,
पर वो झोंके की तरह आए ,
और हमें उड़ाके चल दिए
उनकी क्या बात करें,
ना जीने ना मरने देते है,
शायरी सुन वाह वाह तो करते है,
मतलब जाने बिना चल देते है
--स्नेहा
by स्नेहा---स्नेहासक्त
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