यादों के गलीयारोंसे जो गुजरे हम  

Saturday, August 9, 2008

यादों के गलीयारोंसे जो गुजरे हम,
मिली खट्टी खुशीयॉ और मीठे ग़म,
दो पल की जिंदगी और मिलों का सफ़र,
ये सोच खिला चेहरा और ऑखे नम|
यादों की हर गली अंजान सी लगे,
हर शक्स की ऑखों में पहचान सी लगे,
हर घर की चौखट पे मेरे नाम की दस्तक,
हर घर मे खुद ही मेहमान से लगे...|
--Sneha

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