तुझी प्रितवेडी  

Friday, February 29, 2008

सांगता सांगता शब्द गोठून गेले,
तरंग मनाचे असे विरून गेले,
जगाची मला नसे काही चिंता,
तरी एक दडपण दाटून आले

व्हावे तुझीच प्रित अपुली जूळावी,
तुझी साथ मजला जन्मोजन्मी मिळावी,
तुझी प्रितवेडी तुझी मूर्तवेडी,
तुझी साद कानावरी या पडावी

सांगावेच का..की जाणशील तू,
मनीचे गुपित उलगडशील तू,
नयनांच्या भाषेत उतरेल ते,
सांग तेव्हा कवेत घेशील का तू?

की नाही समजणार तूला माझी प्रित,
की आड येईल जगाची या रीत,
की जाशिल सोडून अधूरी कहाणी,
कशी मग जगेल तुझी ही दिवाणी?

--स्नेहा

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जिंदगी के सफर में  

Thursday, February 7, 2008

जिंदगी के सफर में,
हर एक मोड़ पे
मिलेगा एक शामियाना

यहाँ रुकना है
या चलना है,
तुम्हिको है बताना

जिंदगी सफर तो
अंत शायद मौत है,
तो ना कर कोई बहाना

चल चला चल
हर एक डगर पे,
लुट सफर के मजे रोजाना

--स्नेहा

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तुझ्या जन्मदिनी अशीच तू बहरत रहा  

अशीच रहा उमललेल्या फुलासारखी ......
सुहास्यवदना मनमोहक आणि आनंदी ....
खुल्या आकाशातले एक पाखरू स्वच्छंदी....

पाहेन तुला उड़ताना...
पंखाना वेग देताना....
नविन क्षितिज शोधताना....

तुझ्या जन्मदिनी अशीच तू बहरत रहा,
इच्छा पूर्ण होतील तुझ्या,
मला कधीतरी आठवत जा ....

--स्नेहा

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क्यूँ लग रहा है आज मेरा फ़ैसला गलत  

Tuesday, February 5, 2008

क्यूँ लग रहा है आज मेरा फ़ैसला गलत,
क्यूँ हो गयी है नाजूक मेरे मन की ये हालत,

हमें भुल जाना, जब हमने कहा था,
थामा था हाथ तुमने फ़िर इजहार किया था,
मेह्सुस ना कर पाये थे हाथों की गर्मी को,
आज ढुंढ रहे है उन्ही हाथों की नर्मी को

तुमने दिये थे सपने हजार रंगोंसे बुने,
आसमानसे लाया था तारोंको सजाने,
मुझे लगा था के ये मेरा सपना ही नहीं है,
सच ये है के तेरे बगैरे कोइ अपना ही नहीं है

साथ तुम्हारे जाना मैने खुदको नजदिक से,
तुमने हमेशा समझा है मुझको तहे दिलसे,
मै ही ना समझ पायी तेरे इस प्रयास को,
खुदगर्ज की तरह तोडा तेरे दिलकॊ

क्या मांगा था तुमने? बस प्यार की एक नजर,
जब हो कोइ दुख का साया तो अपनेपन एक नजर,
पर मेरी आंखोंपे एक पर्दासा चढा था,
तेरी हर मांग को हमेशा गलतही पढा था

क्यूँ लग रहा है आज मेरा फ़ैसला गलत,
क्यूँ हो गयी है नाजूक मेरे मन की ये हालत,

--स्नेहा

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इस मोड पे  

इस मोड पे हो जाएंगी राहें जुदा जुदा,
खुशबु तेरी हवा के संग आती रहे सदा,
जो जिक्र हो इमान का याद कर लेना हमें,
मिलेंगे इसी मोड पे नहीं हम बेवफ़ा

--स्नेहा

गर होता मुमकीन तो तकदीर मिटा देते,
हम अपनी दिलसे तेरी तसवीर मिटा देते,
पर कैसे मिटा पाते दर्दे जिगर को,
बेरंग रंगोंमे रंगा है तेरी यादोंमे सिमटके
--स्नेहा

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